Thursday, May 11, 2006

तारीफ

अपने आप को सजाते हुए
कुछ खयाल आते है...
अपने आप पर गुरूर् है.
गुस्ताखी माफ् हो, पर हम सच कहेन्गे
वही खयाल,
साजन के लफ्ज़ो मे होते
तो वो अलफाज़ खूबसूरत कहलाते...
न वो था
न वो है
उसके मिलने की आस तो है
पर आप पर गुरूर कम न होगा....
हम उनके गज़ल है,
चाहे उनके अनकहे हो
पर, हमे अपने आप पर नाज़ है

सचाई किसी ऒर के कहने से ऒर सच नही होती
एक बार झान्क के तो देखो
नाज़ का नज़ारा साफ नज़र आता है.

0 Comments:

Post a Comment

<< Home